Feelings

Feelings 

वो कहता है कि महसूस करती है वो
पर कहती नहीं कुछ वो

नदी के किनारे बैठकर बस वो सोचती ही है 
बस उसे सोचते सोचते मुस्कुरा देती हैं वो 

वो कहती खरगोश सा है वो फ़ुदक कर भाग जाता हैं 
जो उसके पीछे भागू मैं तो वो कही छुप हा जाता है 
फिर भी उसे देख कर ये दिल मुस्कुराता है 

वो कहता है महसूस करती है वो
पर कहती नहीं कुछ वो

नदी के किनारे बैठकर बस वो सोचती ही है 
बस उसे सोचते सोचते मुस्कुरा देती हैं वो 

जब भी बुलाना हो उसको तो संग अपने सेब 
लेकर बैठती है, है तो वो खरगोश जैसा वो 
पर मुंह बनाता है जब उसे गाजर दिखे तो 
वो और दूर भाग जाता है पर जब वो सेब
लाती हैं तो वो आ ही जाता है

वो नदी के किनारे बैठकर 
बस उसे देखते देखते मुस्कुरा ही देती है

वो कहता है महसूस करती है वो
पर कहती नहीं कुछ वो

Penned by Mysticaanjali ✍️ 
"I'm participating in #BlogchatterA2Z" and  Blogchatter

Comments

  1. Your ability to convey complex feelings through your writing is truly commendable. Looking forward to reading more of your heartfelt compositions.

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