Ishq

Ishq 

इश्क़ करके ignore करता,  

कड़वा करेला love more करता।  

कहता तू प्याज़ मेरी जिंदगी की,  

तेरे बिना मेरी चलती कहाँ।  


इश्क़ का मसाला सिमटे तुझमें,  

तेरी यादें दाल में तड़के सी महकती।  

कभी खट्टा, कभी मीठा सा रिश्ता,  

तेरा रूठना अचार का झटका।  


तू है मेरे सपनों की कचौड़ी,  

चटनी-सा प्यार, संग तेरे जोड़ी।  

तेरे आँसू नमकीन मूंग दाल जैसे,  

जिंदगी के स्वाद को चमकाएँ।  


तेरा गुस्सा लहसुन की तरह तगड़ा,  

पर माफी में गुड़ सा मिठास घुल जाए।  

तेरा हँसना करी पत्ते जैसा,  

जो उदास साँसों में खुशबू फैलाए।  


कभी राजमा-चावल सा सुकून तू,  

तो कभी पाव-भाजी सा तूफानी स्वाद।  

तेरा प्यार मेरी थाली का समर्पण,  

तेरे बिना सब फीका, अधूरा, बर्बाद।  


इश्क़ करके ignore करता,  

कड़वा करेला love more करता।  

कहता तू प्याज़ मेरी जिंदगी की,  

तेरे बिना मेरी चलती कहाँ।  

Penned by Mysticaanjali 


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