Kahati Hai Ye Raatein

Kahati Hai Ye Raatein 

कहती हैं ये रातें,  

थक जाए जब हर ख्वाब, और सांसों में हो हलचल


इस आसमां के नीचे तू आ जाना, करीब मेरे 

तू आ जाना, करीब मेरे, जहां खामोशियां गुनगुनाती हैं


हवाएं लाएंगी किस्से अंजान,  

जो तेरी हर उलझन को छूकर  कर देगी हल्का 


तारे लिखेंगे तेरे टूटे सपनों की नई कहानियां,  

और चांद दे देगा तुझको दिलासा अपनी रोशनी से 


तू चाहे तो अपना दर्द बहा देना,  

और खुलकर रो लेना, बिना झिझक के 


क्योंकि इन रातों में हर आंसू हैं अमूल्य तेरे 

और तेरी हर बात सुनने का जज़्बा है इन रातों में 


ये रातें, खुदा की तरह,  

ना नफ़रत रखती हैं और ना शिकायतें रखतीं हैं 

सिर्फ जादू करती हैं, और तुम्हारी हर उलझन को हल करती हैं


बस तू आ जाना, और अपने दिल की लकीरों को  

इन सितारों के बीच पढ़ लेना, इन सितारों के बीच पढ़ लेना,

Penned by Mysticaanjali 


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