Hasratey (हसरतें)
हसरतें तो बहोत कुछ लिखने की थी
पर क्या करे ना वो शख़्स मिला ना उसका अक्स।
न जाने किन-किन गलियों से होकर गुज़रे
न जाने कितने चेहरों से मिले पर मजाल है कि
वो उस राह से गुज़रे, कभी किनारा कर लिया तो
कभी दरकिनार हो गए वो शायद आये और खो गये कही
दिल की स्याही अब भी बेचैन बैठी है
हर पन्ने पर उनका का इंतज़ार लिखने के लिए।
हसरतें तो बहोत कुछ लिखने की थी
पर क्या करे ना वो शख़्स मिला ना उसका अक्स।
🌷(Mysticaanjali)🌷
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